हरियाणा के राज्यपाल ने प्रदेश उपभोक्ता आयोग को दिखाई सीमा

हरियाणा उपभोक्ता विवाद  निवारण आयोग की प्रशासनिक स्वायत्तता बनाम राज्य सरकार के हस्तक्षेप को लेकर जो विवाद आयोग के वर्तमान अध्यक्ष पूर्व न्यायमूर्ति टी पी एस मान द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका लगा कर सामने लाया गया था उसमें अब हरियाणा  के राज्यपाल ने अपने एक आदेश से आयोग को अपनी सीमाओं में कार्य करने के संकेत स्पष्ट तौर पर दे दिए हैं। राज्य आयोग द्वारा कर्मचारियों के तबादले पर लिए गए फैसले को राज्यपाल द्वारा अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए पलट दिया गया है। 

राज्य आयोग को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग द्वारा पहले ही निर्देशित किया गया था कि राज्य आयोग को प्रशासनिक मामलों में राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में कार्य करना अधिनियम के अनुरूप निहित है। हरियाणा सरकार के आयुक्त और सचिव खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले द्वारा आयोग के  वर्तमान सहायक रजिस्ट्रार एडमिस्ट्रेशन विजय शर्मा से कार्यभार तुरंत वापिस लेने और अन्य किसी योग्य अधिकारी को सौंपे जाने के निर्देश भी जारी किये गए हैं।

इसके साथ ही राज्य आयोग के अध्यक्ष पूर्व न्यायमूर्ति टी पी एस मान की कार्य निष्पादन में मनमानी पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।  
लेकिन आयोग अध्यक्ष ने सरकार के निर्देशों को अनदेखा करते हुए फिर से कर्मचारियों के तबादले कर दिए थे। महा माहिम राज्यपाल के उपरोक्त आदेश के द्वारा  अब आयोग के प्रशासनिक निर्णय पर रोक लगा दी गई है। राज्य आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की उच्च न्यायालय की अनुशंसा पर की जाती है।

आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल 4 वर्ष का अधिनियम में निहित है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश की नियुक्ति उनके न्यायिक अनुभव से आयोग में विवाद निवारण में न्यायिक प्रक्रिया को पारदर्शी और सुदृढ़ करने के उदेश्य से की जाती है। उपभोक्ताओं के अधिकारों  को संरक्षण प्रदान करना और उत्पाद व सेवाओं की त्रुटियों में उचित मुआवजा दिलवाना आयोग का प्राथमिक उद्देश्य होता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से आयोग अध्यक्ष और सरकार खुद ही विवाद में उलझे हुए हैं।

राज्य आयोग के वर्तमान अध्यक्ष पूर्व न्यायमूर्ति टीपीएस  मान पर आयोग के प्रशासनिक कार्यों में मनमानी करने के विवाद के कारण आयोग की साख का सवाल भी गंभीर हो गया है। 

राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित और प्रशासनिक कार्य अधिकार क्षेत्र को उपभोक्ता आयोग के वर्तमान अध्यक्ष पूर्व न्यायमूर्ति  टीपीएस मान बार बार चुनौती देते दिखाई देते हैं। 4 वर्ष का पहला कार्यकाल पूरा होने पर पूर्व न्यायमूर्ति टीपीएस मान को राज्य सरकार द्वारा अगले कार्यकाल के लिए सेवा विस्तार दिया गया है। राज्य आयोग के अध्यक्ष को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के कार्यरत न्यायाधीश के समान वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाएं मिलती हैं ।

अर्ध न्यायिक निकाय का ढांचा पुरे प्रदेश में मजबूत करने के साथ साथ जिला स्तर तक में कार्यशीलता को सक्षम करने सामंजस्य स्थापित करने अधिक प्रभावशाली बनाने और आयोग को नयी ऊर्जा प्रदान के इतर हरियाणा उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष जाने क्यों और किन महत्वाकांक्षाओं के प्रभाव से विवाद को जारी रखे हुए है यह सवाल भी समानांतर खड़ा होता है। अधिनियम में तय 3 से 5 महीने की समय-सीमा के भीतर निपटान की दर बहुत कम, यानी 1.4% है, जो लगातार हो रही देरी को दर्शाता है।  

कंज्यूमर जस्टिस रिपोर्ट 2026′ उन कई वजहों पर रोशनी डालती है जिन्होंने भारत में उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के सिस्टम को काफी कमजोर कर दिया है। मामलों के निपटारे में पारदर्शिता की कमी, मामलों का बड़ी संख्या में लंबित रहना, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा कम होता है। खाली पदों और कमज़ोर स्टाफिंग के कारण कामकाज में अक्षमता। लीडरशिप के पदों पर जेंडर प्रतिनिधित्व में कमी। मध्यस्थता और विवाद सुलझाने के वैकल्पिक तरीकों का सीमित इस्तेमाल।

हालाँकि 21 राज्यों के आयोग के कुल बजट आबंटन पिछले चार वर्षों में 52 % बढ़ा कर 668 करोड़ कर दिया गया है। रिपोर्ट जारी करते हुए, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एसके कौल ने बड़ी संख्या में खाली पदों और लंबित मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि इससे शिकायत निवारण सिस्टम में कंज्यूमर का भरोसा कम हो रहा है। “संसद की इच्छा कानून में दिखती है, लेकिन अगर कानून को ही बेकार कर दिया जाए, तो वह इच्छा भी पूरी नहीं हो पाती। कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 से देश में कंज्यूमर प्रोटेक्शन की क्षमता बेहतर होने की उम्मीद थी।”

कंज्यूमर्स इंडिया की प्रेसिडेंट डॉ. जयश्री गुप्ता (जो भारत सरकार की पूर्व एडिशनल सेक्रेटरी और आईडीपीएल, एक सरकारी उपक्रम, की पूर्व अध्यक्ष व महाप्रबंधक रह चुकी हैं) ने 24 नवंबर, 2025 को हरियाणा राज्य उपभोक्ता आयोग और पंचकूला जिला उपभोक्ता आयोग का दौरा किया।

उन्होंने हरियाणा राज्य में उपभोक्ता आयोगों के कामकाज की समीक्षा करने और उसे समझने के लिए वहां के प्रेसिडेंट, सदस्यों और अन्य लोगों के साथ विस्तार से चर्चा की और कुछ सुझाव प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी  को एक पत्र द्वारा प्रेषित किये थे। डॉ जयश्री गुप्ता ने अपनी विवेचना में यह संदर्भ भी दिया कि पिछले तीन सालों में 12.7% मामलों का निपटारा तय समय-सीमा के भीतर किया गया है, लेकिन परफॉर्मेंस में गिरावट का रुझान दिख रहा है – 2023 में यह 15% था, जो मौजूदा साल 2025 में घटकर 10.9% हो गया है।

यह समझना मुश्किल है कि दो बेंच होने के बावजूद, पिछले तीन सालों में स्टेट कमीशन में मामलों के निपटारे की कुल दर 33.4% जितनी कम क्यों रही है। इस परिस्थितियों में प्रदेश की सरकार पर उपभोक्तांओं के अधिकारों के वास्तविक संरक्षण का दयित्व ज्यादा गंभीर हो जाता है। सरकार के मजबूत निर्णय ही आयोग की दशा को दुरुस्त करने में सहायक हो सकते हैं। 

(जगदीप सिंह सिंधु वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

Leave a Reply